बुलबुल, खाकी: द बिहार चैप्टर और कई यादगार प्रोजेक्ट्स में अपने सधी हुई और गहराई भरी अदाकारी के लिए सराहे जा चुके अविनाश तिवारी ने 'द मेहता बॉयज़' में अमय मेहता के किरदार के ज़रिए दर्शकों के दिलों को छू लिया था। यह परफॉर्मेंस न सिर्फ़ खूब पसंद की गई, बल्कि अविनाश के करियर में एक और यादगार किरदार के रूप में दर्ज हो गई।
साल 2025 में रिलीज़ हुई 'द मेहता बॉयज़' को अब एक साल पूरा हो चुका है। इस मौके पर अविनाश ने उस फ़िल्म को याद किया, जो बिना शोर मचाए, क्रेडिट्स के बाद भी दर्शकों के साथ बनी रही। इस खास पड़ाव पर उन्होंने फ़िल्म और उस किरदार के सफ़र को याद करते हुए अपने दिल की बात साझा की।
फ़िल्म और बोमन ईरानी के साथ काम करने के अनुभव पर बात करते हुए अविनाश कहते हैं, "'द मेहता बॉयज़' को रिलीज़ हुए एक साल हो गया है, लेकिन मैं आज भी इस फ़िल्म से गहराई से जुड़ा हुआ महसूस करता हूं। जिस पल ये कहानी मेरे पास आई, उसकी सच्चाई और भावनात्मक गहराई से मैं तुरंत जुड़ गया। अमय बहुत असली लगा – खामियों से भरा, नाज़ुक, इंसानी। ऐसे में इसे ना कहना मेरे लिए मुमकिन ही नहीं था। मुझे याद है, मैंने खुद से कहा था, 'अगर तुम खुद को सच में कलाकार कहते हो, तो इसे जाने नहीं दे सकते,' और मैंने बिना हिचक हां कर दी।
बोमन ईरानी के साथ काम करना बेहद खास अनुभव रहा। एक अभिनेता और निर्देशक, दोनों रूपों में वो कमाल के हैं और लगातार मुझे खुद को और आगे ले जाने के लिए प्रेरित करते रहे। वो अक्सर मुझसे कहते थे, 'अरे, ढाई एक्टर नहीं है तेरे जैसे। अविनाश, बस खुलकर कर!' उस एक सोच ने सब कुछ बदल दिया और मुझे बिना डर के एक्सपेरिमेंट करने की आज़ादी मिल गई।"
वो आगे जोड़ते हैं, "इस फ़िल्म को खास बनाता है ये तथ्य कि ये सिर्फ़ पिता–पुत्र की कहानी नहीं है। ये हर उस रिश्ते की झलक है, जो अहंकार, खामोशी और गलतफहमियों से गढ़े जाते हैं। जिन्होंने भी ये फ़िल्म देखी और मुझसे संपर्क कर बताया कि ये उन्हें कितनी गहराई से छू गई, उस प्यार के लिए मैं दिल से आभारी हूं। वो मेरे लिए बहुत मायने रखता है।"
'द मेहता बॉयज़' में अविनाश ने अपनी सबसे संयमित और अंतरंग परफॉर्मेंस में से एक दी। मुंबई में संघर्ष करता एक जूनियर आर्किटेक्ट, जो करीब एक दशक से दुनिया और खुद को अपनी काबिलियत साबित करने की कोशिश में लगा है। इस किरदार में इम्पोस्टर सिंड्रोम को जिस सटीकता से उन्होंने निभाया, वो बेहद असरदार रहा।
फ़िल्म का भावनात्मक केंद्र एक बिछड़े हुए पिता और बेटे का रिश्ता है, जिन्हें अमय की मां के निधन के बाद एक छोटे से अपार्टमेंट में 48 घंटे साथ बिताने पड़ते हैं। बोमन ईरानी के सख़्त और अड़ियल शिव मेहता के सामने, अविनाश का अमय सालों की अनकही नाराज़गी, निराशा और चाहत अपने भीतर समेटे रहता है। उनकी मजबूरी में साथ बिताई गई ये घड़ियां पीढ़ियों के टकराव का मैदान बन जाती हैं – जहां खामोशी, अधिकार और प्यार को ज़ाहिर न कर पाने की जद्दोजहद है। पूरी फ़िल्म में अमय का भावनात्मक हिसाब–किताब उसके प्रोफेशनल जागरण के साथ चलता है, जहां वो धीरे–धीरे अपने पिता, अपने दुख और अंततः अपनी आवाज़ का सामना करना सीखता है।
एक साल बाद, 'द मेहता बॉयज़' अविनाश तिवारी की उस समझ की याद दिलाती है, जिससे वो ऐसे किरदार चुनते हैं जो उनकी बहुआयामी प्रतिभा को सामने लाते हैं। जहां फ़िल्म की पहली सालगिरह का जश्न जारी है, वहीं उनकी आने वाली फ़िल्म 'ओ रोमियो' पहले ही उनके तीखे और बदले हुए अंदाज़ को लेकर चर्चा में है। इसके अलावा इम्तियाज़ अली की 'ओ साथी रे' और प्रशांत झा की 'गिन्नी वेड्स सनी 2' भी उनकी झोली में हैं, जो उन्हें अपनी पीढ़ी के सबसे भरोसेमंद और रोमांचक कलाकारों में और मज़बूती से स्थापित करती हैं।
Tags
Actor
Actress
Bollywood
Bollywood News
Entertainment
Latest News
Manoranjan Metro
Mumbai
News
recent
Trending News