• धरमन बीबी और करमन बाई का 1857 के संग्राम में अप्रतिम योगदान: मुरली मनोहर श्रीवास्तव
पटना: रोटरी क्लब, पटना के तत्वावधान में प्रसिद्ध लेखक एवं पत्रकार मुरली मनोहर श्रीवास्तव द्वारा लिखित ऐतिहासिक पुस्तक ‘वीर कुंवर सिंह की प्रेमकथा’ पर एक विशेष साहित्यिक एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस परिचर्चा में पुस्तक के लेखक मुरली मनोहर श्रीवास्तव मुख्य अतिथि वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुरली मनोहर श्रीवास्तव ने 1857 के महानायक बाबू वीर कुंवर सिंह के जीवन के अनछुए पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह महज एक प्रेमकथा नहीं, बल्कि देशप्रेम और अप्रतिम त्याग की अद्वितीय गाथा है। उन्होंने रेखांकित किया कि किस तरह समाज के अंतिम पायदान पर खड़ी एक नर्तकी 'धरमन बीबी' ने बाबू कुंवर सिंह के साथ मिलकर आजादी की लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाई और अपनी जीवनभर की संचित पूंजी को देश सेवा में समर्पित कर दिया। लेखक ने कहा कि धरमन बीबी और उनकी छोटी बहन करमन बाई ने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में बाबू कुंवर सिंह के कंधे से कंधा मिलाकर भागीदारी निभाई और इतिहास के पन्नों में सदा के लिए अमर हो गईं।
गोष्ठी का कुशल संचालन रोटरी क्लब, पटना के अध्यक्ष डॉ. रवि कुमार सिन्हा ने किया। इस अवसर पर लेखक कमल किशोर वर्मा ने भी बाबू वीर कुंवर सिंह के व्यक्तित्व, कृतित्व और 1857 के संग्राम में उनके ऐतिहासिक योगदान पर अपनी कविता प्रस्तुत किया। इस साहित्यिक विचार गोष्ठी में अचलेश नंदन, रंजीत राम, रश्मि जी और शिक्षाविद मृत्युंजय सिंह सहित शहर के कई प्रबुद्ध नागरिक, साहित्यप्रेमी एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने इतिहास के इन उपेक्षित स्वर्णिम अध्यायों को समाज के समक्ष लाने के लिए लेखक के शोधपरक प्रयासों की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
Scan & Donate >

