घर सिर्फ रहने की जगह नहीं होता, बल्कि यह हमारी जिंदगी का एक अहम हिस्सा होता है। घर में सामान किस तरह रखा गया है, फर्नीचर की जगह कैसी है, प्राकृतिक रोशनी कितनी आती है और घर कितना साफ-सुथरा है, इन सभी बातों का असर वहां के माहौल पर पड़ता है। वास्तु विशेषज्ञ गौरी जैन का मानना है कि घर को सुंदर, शांत और सकारात्मक बनाने के लिए हमेशा बड़े बदलाव या महंगे रेनोवेशन की जरूरत नहीं होती। कई बार छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर भी घर का माहौल बेहतर बनाया जा सकता है।
घर का वास्तु देखते समय सबसे पहले वह किन बातों पर ध्यान देती हैं, इस बारे में बात करते हुए गौरी कहती हैं, “जब मैं किसी घर का वास्तु देखने जाती हूं, तो सबसे पहले घर के मुख्य दरवाजे पर ध्यान देती हूं। मैं देखती हूं कि दरवाजा किस दिशा में है, उसकी जगह कैसी है और उसके आसपास कितनी खुली जगह है। इसके साथ ही मैं यह भी देखती हूं कि दरवाजे का आकार कैसा है और उसके आसपास का माहौल कैसा है।”
वह आगे बताती हैं, “इसके बाद मैं पूरे घर को देखती हूं। घर की दिशा, बनावट, उत्तर-पूर्व और दक्षिण-पश्चिम का संतुलन, घर का बीच का हिस्सा और आग, पानी व मिट्टी से जुड़ी चीजें कहां रखी गई हैं, इन सभी बातों पर ध्यान देती हूं।”
गौरी का मानना है कि घर में सकारात्मक माहौल बनाने के लिए बड़े बदलाव करना जरूरी नहीं है। वह कहती हैं, “घर को बेहतर और संतुलित बनाने के लिए हमेशा तोड़फोड़ या बड़े बदलाव करने की जरूरत नहीं होती। कई बार वास्तु से जुड़े कुछ आसान उपाय करने से भी घर ज्यादा खुला, शांत और व्यवस्थित महसूस होने लगता है।”
वह सलाह देती हैं कि सबसे पहले घर से बेकार सामान हटाना चाहिए। गौरी कहती हैं, “मेरी सलाह होती है कि सबसे पहले घर में जमा बेकार सामान को हटाएं। बहुत ज्यादा सामान होने से घर भरा हुआ लगता है और आने-जाने में भी परेशानी होती है। उत्तर-पूर्व दिशा को साफ, खुला और रोशनी से भरा रखना चाहिए। वहीं, दक्षिण-पश्चिम दिशा में भारी सामान रखना बेहतर माना जाता है।”
इसके अलावा वह घर के मुख्य दरवाजे को साफ रखने, प्राकृतिक रोशनी और हवा आने की अच्छी व्यवस्था करने और घर के बीच वाले हिस्से को खुला रखने की सलाह देती हैं। वह कहती हैं, “पानी के लीक होते नलों और खराब चीजों को समय पर ठीक करवाना चाहिए। टूटे हुए या इस्तेमाल में नहीं आने वाले सामान को लंबे समय तक घर में नहीं रखना चाहिए। रसोई व्यवस्थित होनी चाहिए और बेडरूम ऐसा होना चाहिए, जहां आराम और अच्छी नींद मिल सके। घर में इलेक्ट्रॉनिक सामान और उससे जुड़ा बेकार सामान भी कम रखना चाहिए।”
फर्नीचर की सही जगह को भी गौरी काफी जरूरी मानती हैं। उनके मुताबिक, गलत जगह पर रखा भारी फर्नीचर कमरे को छोटा और भरा हुआ दिखा सकता है। वहीं, सही तरीके से फर्नीचर रखने से कमरे में आने-जाने की जगह बढ़ती है और रोशनी व हवा भी बेहतर तरीके से आती है।
वह कहती हैं, “वास्तु के अनुसार, भारी फर्नीचर और स्टोरेज के लिए दक्षिण, पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम दिशा को बेहतर माना जाता है। वहीं, उत्तर-पूर्व और घर के बीच वाले हिस्से को हल्का और खुला रखना चाहिए।”
घर में शांति और आपसी तालमेल बनाए रखने के लिए किन जगहों का खास ध्यान रखना चाहिए, इस पर गौरी कहती हैं, “उत्तर-पूर्व दिशा साफ, हल्की और खुली होनी चाहिए। दक्षिण-पश्चिम दिशा को स्थिर और मजबूत माना जाता है। घर के बीच वाले हिस्से में ज्यादा सामान नहीं रखना चाहिए। बेडरूम ऐसा होना चाहिए, जहां अच्छी नींद आए और रिश्तों में प्यार बना रहे। वहीं, मुख्य दरवाजा साफ होना चाहिए और उसके सामने कोई रुकावट नहीं होनी चाहिए।”
गौरी घर की साफ-सफाई और बेकार सामान हटाने पर भी जोर देती हैं। वह कहती हैं, “वास्तु में साफ-सफाई और घर को व्यवस्थित रखना बहुत जरूरी माना जाता है। जब घर में जरूरत से ज्यादा सामान होता है, तो जगह भरी हुई और अव्यवस्थित लगती है। खासकर उत्तर-पूर्व दिशा और घर के बीच वाले हिस्से में बेकार सामान रखने से बचना चाहिए।”
जो लोग घर के वास्तु में सुधार करना चाहते हैं, लेकिन ज्यादा पैसे खर्च नहीं करना चाहते, उनके लिए गौरी कुछ आसान उपाय बताती हैं। वह कहती हैं, “घर के उत्तर-पूर्व और बीच वाले हिस्से से बेकार सामान हटा दें। मुख्य दरवाजे को साफ रखें और वहां कोई रुकावट न होने दें। घर में प्राकृतिक रोशनी और हवा आने दें। खराब नलों और टूटी हुई चीजों को ठीक करवाएं। बेड के नीचे जरूरत से ज्यादा सामान रखने से बचें और दक्षिण-पश्चिम दिशा में भारी सामान को सही तरीके से रखें।”
वह आगे कहती हैं कि फर्नीचर को सही जगह पर रखना, इस्तेमाल में नहीं आने वाली चीजों को हटाना और घर की नियमित सफाई करना ऐसे आसान उपाय हैं, जिन पर ज्यादा खर्च नहीं होता। इनसे घर ज्यादा साफ, खुला और व्यवस्थित दिख सकता है।
घर की किन दिशाओं में भारी सामान रखने से बचना चाहिए, इस सवाल पर गौरी कहती हैं, “वास्तु के अनुसार, उत्तर-पूर्व दिशा और घर के बीच वाले हिस्से को भारी सामान से भरने से बचना चाहिए। उत्तर और पूर्व दिशा को भी जितना हो सके खुला रखना चाहिए, ताकि रोशनी और हवा आसानी से आ सके।”
वह आगे बताती हैं, “इन जगहों पर बहुत ज्यादा सामान, भारी फर्नीचर या सीढ़ियां होने से जगह भरी हुई लग सकती है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर दिशा को पूरी तरह खाली रखा जाए। जरूरी यह है कि घर की दिशा और बनावट के हिसाब से सामान को सही जगह पर रखा जाए।”
गौरी के अनुसार, घर में प्राकृतिक रोशनी का भी खास महत्व है। वह कहती हैं, “वास्तु में प्राकृतिक धूप को रोशनी, ऊर्जा और सकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है। धूप आने से घर उजला और हवादार रहता है। इससे घर में सीलन, अंधेरे और घुटन का एहसास भी कम हो सकता है।”
अपनी बात खत्म करते हुए गौरी कहती हैं, “वास्तु में सुबह की पूर्व दिशा से आने वाली धूप को खास तौर पर अच्छा माना जाता है। जिस घर में अच्छी रोशनी और हवा आती है, वह आमतौर पर ज्यादा खुला, ताजा और सुकून भरा महसूस होता है।”
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