लोग भविष्यवाणियों पर ज्यादा निर्भर हो रहे हैं, क्योंकि वे पहले से ज्यादा चिंतित हैं’: मुनीषा खटवानी - Manoranjan Metro

    जानी-मानी ज्योतिषी और सेलिब्रिटी टैरो कार्ड रीडर मुनीषा खटवानी का मानना है कि आजकल लोग टैरो, ज्योतिष और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के दूसरे तरीकों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। उनके मुताबिक, जिंदगी में बढ़ती अनिश्चितता के कारण लोग अपने भविष्य को लेकर पहले से ज्यादा चिंतित हैं और यह जानने के लिए बेचैन रहते हैं कि आगे उनके साथ क्या होने वाला है।

    इस बारे में बात करते हुए मुनीषा कहती हैं, “लोग भविष्यवाणियों पर ज्यादा निर्भर हो रहे हैं, क्योंकि वे पहले से ज्यादा चिंतित हैं। लोग अपनी जिंदगी को लेकर तुरंत जवाब चाहते हैं, खासकर जब बात करियर और रिश्तों की आती है। रिश्ते आजकल चिंता की एक बड़ी वजह बन गए हैं। इसी कारण लोग टैरो, ज्योतिष, एनर्जी रीडिंग और न्यूमरोलॉजी जैसे अलग-अलग तरीकों से मार्गदर्शन लेने लगे हैं। लोगों का इन चीजों की ओर झुकाव लगातार बढ़ रहा है।”

    अपनी रीडिंग के बारे में बात करते हुए वह बताती हैं कि वह जो भी देखती हैं, उसे ईमानदारी से बताने की कोशिश करती हैं। वह कहती हैं, “मेरा मानना है कि लोगों को अपने जीवन में उन अनुभवों से गुजरना ही होता है। कई बार मुझे उनकी उम्मीदों के विपरीत बातें बतानी पड़ती हैं, जिससे मुझे भी अच्छा नहीं लगता। लेकिन मेरा मानना है कि मुझे अपने काम के प्रति पूरी तरह ईमानदार रहना चाहिए। जिस पेशे ने मुझे सब कुछ दिया है, उसके प्रति अगर मैं ईमानदार नहीं रहूंगी, तो मुझे नहीं लगता कि ब्रह्मांड भी मेरा साथ देगा।”

    मुनीषा का कहना है कि परिस्थितियां कितनी भी मुश्किल क्यों न हों, वह सच बताने की कोशिश करती हैं। हालांकि, कई बार सामने वाले की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए अपनी बात रखने का तरीका बदल देती हैं। वह कहती हैं, “कभी-कभी मैं अपनी बात को थोड़ा नरम तरीके से कहती हूं और शब्दों का चुनाव सोच-समझकर करती हूं। अगर मुझे लगता है कि कोई क्लाइंट सीधे तौर पर ना सुनने के लिए बहुत संवेदनशील है, तो मैं कह सकती हूं कि फिलहाल संभावनाएं बहुत मजबूत नहीं दिख रही हैं। आमतौर पर मैं अपनी बात साफ-साफ कहती हूं, लेकिन जरूरत पड़ने पर शब्दों को थोड़ा नरम कर देती हूं, ताकि सामने वाले तक मेरा संदेश भी पहुंच जाए।”

    तर्क और अंतर्ज्ञान यानी इन्ट्यूशन के बीच चलने वाली बहस पर अपनी राय रखते हुए मुनीषा कहती हैं, “इन्ट्यूशन वह होता है, जिसे आप अंदर से बहुत गहराई से महसूस करते हैं, जबकि तर्क अक्सर उसे चुनौती देता है, क्योंकि वह हमारे व्यावहारिक दिमाग से आता है। जब भी मैंने अपनी अंदर की आवाज को नजरअंदाज किया है, मुझे बाद में पछताना पड़ा है, क्योंकि आखिरकार चीजें मेरे खिलाफ गई हैं। समय के साथ मैंने अपनी अंतरात्मा की आवाज पर भरोसा करना सीख लिया है।”

    सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और वहां दिखाए जाने वाले तुरंत उपायों के बीच मुनीषा लोगों को फर्जी टैरो रीडर्स से सावधान रहने की सलाह भी देती हैं। वह कहती हैं, “ऐसा लगता है जैसे सोशल मीडिया पर आज हर कोई टैरो कार्ड रीडर बन गया है। कई लोग खुद सीखकर इस क्षेत्र में आते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जो फर्जी हैं और लोगों के साथ धोखाधड़ी करते हैं। इसलिए हां, इस पेशे की विश्वसनीयता पर कुछ हद तक खतरा जरूर है। हालांकि, मेरा मानना है कि जो लोग आपको जानते हैं, वे आपकी सच्चाई और ईमानदारी को पहचान सकते हैं।”

    अपनी बात खत्म करते हुए मुनीषा कहती हैं, “मुझे अपनी ईमानदारी साबित करने के लिए बार-बार खुद का प्रचार करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि जो लोग मुझे और मेरे काम को जानते हैं, उन्हें मेरी सच्चाई पता है। अगर लोगों को आप पर भरोसा है और वे जानते हैं कि आप अपना काम ईमानदारी से करते हैं, तो वे आपके पास आते रहेंगे।”

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