मुंबई: गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर अंधेरी (पश्चिम) स्थित लक्ष्मी बिजनेस पार्क के ‘फनकार’ स्टूडियो में श्रीकृष्ण भक्ति, साहित्य, संगीत और शायरी का अनूठा संगम देखने को मिला। ‘बिग बैड क्रिएटर्स’ द्वारा आयोजित इस एक दिवसीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक उत्सव में काव्य-विमर्श से लेकर कवि सम्मेलन और मुशायरे तक की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को देर तक बाँधे रखा। कार्यक्रम का डिजिटल प्रसारण प्रतिष्ठित यूट्यूब चैनल ‘Kaifebollywood’ पर भी किया गया, जिसे एक हजार से अधिक (1K+) लाइव दर्शकों ने देखा।
कार्यक्रम की शुरुआत ‘श्रीकृष्ण भक्ति काव्य’ सत्र से हुई। इसमें भक्त कवि श्री दास नारायण जी के लेखन पर प्रोफेसर दयानंद जी तिवारी और विद्वान श्री वीरेंद्र याज्ञिक जी ने गंभीर अकादमिक विमर्श किया। इसके बाद पंडित मुस्तफ़ा आरिफ कृत ‘गीता भारती' के मुक्तकों में गायन पक्ष’ विषय पर संगीताचार्य विवेक प्रकाश जी ने अपने विचार रखते हुए साहित्य और संगीत के अंतर्संबंध पर प्रकाश डाला।
शाम का प्रमुख आकर्षण कवि सम्मेलन एवं मुशायरा रहा। बॉलीवुड के मशहूर गीतकार एवं शायर नवाब आरज़ू साहब की सदारत और कमर हाजीपुरी की निजामत में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए रचनाकारों ने अपनी कविताओं और शायरी से महफ़िल को सजाया। आरिफ महमूदाबादी, अनिल गौड़, फ़ैज़ लखनवी, ताबिश रामपुरी, यूसुफ़ यलगार, श्रुति भट्टाचार्य, सुप्रसिद्ध फ़िल्म गीतकार अराफ़ात महमूद, रास बिहारी पांडेय, ज़ुबैर राही और अज़हर हुसैन ‘अज़हर’ सहित अन्य रचनाकारों ने अपनी प्रस्तुतियाँ दीं।
कार्यक्रम में शहर की साहित्यिक, सांस्कृतिक और फिल्मी दुनिया से जुड़े अनेक गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे। इनमें पूर्व डीसीपी, मुंबई पुलिस श्री प्रदीप सोनावाने, प्रसिद्ध फ़िल्म निर्देशक एवं लेखक श्री सुशील योगी जी, शास्त्रीय गायिका सुश्री छाया साखरे, गायिका रचना वर्तक, वरिष्ठ प्रचारक समरजीत, फ़िल्म निर्देशक रहमत अली तथा आरजे एवं अभिनेत्री रेखा चौधरी प्रमुख रूप से शामिल रहे। इन विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया।
संगीतकार पद्मश्री अली गनी की उपस्थिति और उनकी गायकी कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रही। उन्होंने अपनी प्रस्तुति से ऐसा समां बाँधा कि श्रोता मंत्रमुग्ध होकर सुनते रहे। उनकी गायकी के दौरान सभागार में मौजूद दर्शकों ने भरपूर सराहना की और महफ़िल देर तक संगीत के रंग में डूबी रही।
कार्यक्रम के आयोजक एवं संयोजक शामी एम. इरफ़ान ने आयोजन को मिले स्नेह और समर्थन के लिए मुंबई के साहित्य एवं कला प्रेमियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि साहित्य, संगीत और सांस्कृतिक संवाद को एक साझा मंच पर लाना इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य था और प्रत्यक्ष श्रोताओं के साथ-साथ डिजिटल मंच पर मिली प्रतिक्रिया ने इस प्रयास को उत्साह प्रदान किया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर पंडित सुभाष चंद्र त्रिपाठी ने सभी अतिथियों, रचनाकारों, कलाकारों, सहयोगियों तथा ऑनलाइन जुड़े दर्शकों के प्रति आभार व्यक्त किया। श्रीकृष्ण भक्ति, कविता, शायरी और संगीत से सजी यह महफ़िल अपनी विविध प्रस्तुतियों के साथ संपन्न हुई।
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