“सुरक्षा किसी की आर्थिक हैसियत पर निर्भर नहीं होनी चाहिए”: सेलिब्रिटी की सुरक्षा पर सूरज सोनिक - Manoranjan Metro

    ‘सुल्तान’ और ‘भूत: द हॉन्टेड शिप’ जैसी फिल्मों के साथ-साथ कई डिजिटल और टेलीविजन विज्ञापन अभियानों का हिस्सा रह चुके अभिनेता सूरज सोनिक का मानना है कि व्यक्तिगत सुरक्षा हर किसी की प्राथमिकता होनी चाहिए, फिर चाहे वह व्यक्ति किसी भी पेशे से जुड़ा हो या समाज में उसकी कोई भी पहचान हो। टाइगर श्रॉफ से जुड़ी हालिया गोलीबारी की घटना के बाद एक बार फिर सेलिब्रिटीज की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। ऐसे में सूरज सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, पुलिस और निजी सुरक्षा टीमों के बीच बेहतर तालमेल बनाने और किसी भी संभावित खतरे को समय रहते पहचानने की जरूरत पर जोर देते हैं। उनका मानना है कि फिल्म इंडस्ट्री को सतर्क रहने की जरूरत है, लेकिन इसके साथ ही ऐसा माहौल बनाना भी जरूरी है, जहां लोग बिना किसी डर के अपना काम कर सकें।

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    सूरज कहते हैं, “ईमानदारी से कहूं तो इस तरह की कोई भी घटना चिंताजनक होती है। यह सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चिंता का विषय है। अभिनेता होने के नाते लोग हमें पहचानते हैं और हम जहां भी जाते हैं, लोग हमें जानते हैं। लेकिन आखिरकार हम भी इंसान हैं। हमारे परिवार और करीबी लोग भी हमारी चिंता करते हैं। मुझे नहीं लगता कि ऐसी घटनाओं पर घबराहट में प्रतिक्रिया देनी चाहिए, लेकिन इन्हें गंभीरता से लेना बेहद जरूरी है।”

    बॉलीवुड सितारों की सुरक्षा व्यवस्था में किसी तरह की कमी होने के सवाल पर अभिनेता का मानना है कि किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले घटना से जुड़े सभी तथ्यों को समझना जरूरी है। उनके अनुसार, बेहतर योजना और आपसी तालमेल के जरिए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सकता है।

    वह कहते हैं, “सभी तथ्यों को जाने बिना मैं यह नहीं कहना चाहूंगा कि सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक हुई है या नहीं। सुरक्षा की जिम्मेदारी काफी जटिल होती है और हमें उन लोगों के काम का सम्मान करना चाहिए, जो हमारी सुरक्षा के लिए मेहनत करते हैं। हालांकि, मुझे लगता है कि हर व्यवस्था में सुधार की गुंजाइश होती है। बेहतर तालमेल, अधिक जागरूकता और संभावित खतरों को समय रहते पहचानने की दिशा में काम किया जा सकता है। किसी पर आरोप लगाने के बजाय हमें इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि आगे सुरक्षा व्यवस्था को और बेहतर कैसे बनाया जा सकता है।”

    सूरज का यह भी मानना है कि किसी भी संभावित खतरे के संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उनके अनुसार, अगर किसी तरह की विश्वसनीय धमकी मिलती है, तो उस पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सेलिब्रिटीज, उनकी टीमों और पुलिस के बीच स्पष्ट संवाद होना भी बेहद जरूरी है।

    अभिनेता कहते हैं, “मेरे हिसाब से सही समय पर बातचीत और कार्रवाई बहुत महत्वपूर्ण है। कभी-कभी कोई छोटी-सी चेतावनी भी गंभीर रूप ले सकती है, अगर उसका सही तरीके से आकलन न किया जाए। अगर कोई विश्वसनीय धमकी मिलती है, तो उसे गंभीरता से लेना चाहिए, पेशेवर तरीके से उसकी जांच होनी चाहिए और समय रहते जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए। सेलिब्रिटीज, उनकी टीमों और पुलिस के बीच संवाद का एक स्पष्ट माध्यम होना चाहिए, ताकि किसी भी चिंता या खतरे की जानकारी बिना झिझक साझा की जा सके। बाद में उसके नतीजों से निपटने के बजाय पहले ही सावधानी बरतना बेहतर है।”

    जब उनसे पूछा गया कि क्या सेलिब्रिटीज को अपनी निजी सुरक्षा पर अधिक खर्च करना चाहिए या पुलिस पर भरोसा करना चाहिए, तो सूरज का कहना है कि दोनों की अपनी-अपनी जिम्मेदारियां हैं। निजी सुरक्षा अतिरिक्त मदद दे सकती है, लेकिन कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस की भूमिका की जगह नहीं ले सकती।

    वह बताते हैं, “मुझे लगता है कि सुरक्षा एक साझा जिम्मेदारी है, लेकिन सभी की भूमिकाएं अलग-अलग हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखना और नागरिकों की सुरक्षा करना सरकार और पुलिस की जिम्मेदारी है। वहीं, सेलिब्रिटीज और उनकी टीमों को भी अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा को लेकर समझदारी और जिम्मेदारी से काम लेना चाहिए। निजी सुरक्षा निश्चित रूप से मददगार हो सकती है, लेकिन वह पुलिस की भूमिका का विकल्प नहीं है। आखिरकार, सुरक्षा ऐसी सुविधा नहीं बननी चाहिए जो इस बात पर निर्भर करे कि कोई व्यक्ति कितना पैसा खर्च कर सकता है। हर नागरिक को सुरक्षित महसूस करने का अधिकार है।”

    सलमान खान, रोहित शेट्टी और टाइगर श्रॉफ से जुड़ी घटनाओं का जिक्र करते हुए सूरज का मानना है कि फिल्म इंडस्ट्री को सतर्क रहने की जरूरत है, लेकिन जांच पूरी होने से पहले इन घटनाओं के बीच किसी तरह का संबंध या किसी खास मकसद को लेकर निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। उनके अनुसार, हर घटना की स्वतंत्र रूप से और पूरी गंभीरता के साथ जांच होनी चाहिए।

    अभिनेता का मानना है कि लंबे समय तक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केवल सुरक्षा कर्मियों की संख्या बढ़ाना काफी नहीं है। संभावित खतरों का सही आकलन, सुरक्षा टीमों और पुलिस के बीच बेहतर तालमेल, संवेदनशील जानकारी को जिम्मेदारी से संभालना और आपातकालीन स्थितियों से निपटने की स्पष्ट योजना भी उतनी ही जरूरी है।

    सूरज अपनी बात खत्म करते हुए कहते हैं, “मुझे लगता है कि इसका समाधान सिर्फ किसी के घर के बाहर ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात करने तक सीमित नहीं है। हमें संभावित खतरों का बेहतर आकलन करने, सुरक्षा टीमों और पुलिस के बीच सही तालमेल बनाने, संवेदनशील जानकारी को जिम्मेदारी से संभालने और आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए स्पष्ट योजना तैयार करने की जरूरत है। विश्वसनीय धमकियों की जानकारी समय पर देना और उनकी जांच करना भी जरूरी है। हमारा मकसद डर का माहौल बनाना नहीं होना चाहिए। हमें ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए, जहां लोग ज्यादा सुरक्षित महसूस करते हुए अपना काम कर सकें, यात्रा कर सकें और अपनी जिंदगी जी सकें।”

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