टेलीविजन अभिनेत्री ज्योति तिवारी ने ‘देवांशी’, ‘हमारीवाली गुड न्यूज’, ‘मेरी हानिकारक बीवी’, ‘विद्या’, ‘नागिन 6’, ‘कुमकुम भाग्य’ और ‘कुंडली भाग्य’ जैसे कई शोज में काम किया है। इन दिनों वह शो ‘हुई गुम यादें’ में नजर आ रही हैं। हाल ही में अभिनेत्री ने एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में अपने सफर, अभिनय को करियर के रूप में चुनने पर परिवार की प्रतिक्रिया और अपने पिता से मिले सहयोग के बारे में बात की। इसके साथ ही उन्होंने टेलीविजन में काम पाने की कोशिश कर रहे नए कलाकारों को भी कई अहम सुझाव दिए।
एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में आने के अपने फैसले के बारे में बात करते हुए ज्योति ने कहा, “मैं मूल रूप से उत्तर भारत से हूं और एक मिडिल क्लास परिवार से ताल्लुक रखती हूं। मेरे परिवार के लोगों ने एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के बारे में अच्छी और बुरी, दोनों तरह की बातें सुनी थीं। जब मैंने शुरुआत की थी, तब इस इंडस्ट्री में काम करने को करियर के अच्छे विकल्प के रूप में नहीं देखा जाता था। इसलिए शुरुआत में मुझे ज्यादा समर्थन नहीं मिला।”
हालांकि, उनके पिता ने हमेशा उनका हौसला बढ़ाया और अपने सपने को पूरा करने के लिए प्रेरित किया। ज्योति ने बताया कि उनके पिता भी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में आना चाहते थे, लेकिन किसी वजह से अपना यह सपना पूरा नहीं कर पाए। उन्होंने कहा, “मेरे पिता हमेशा से इस इंडस्ट्री में आना चाहते थे। शायद वह अपना सपना पूरा नहीं कर पाए, इसलिए उन्होंने मेरा बहुत साथ दिया। मैंने उनसे यह भी कहा था कि मैं सफल होकर दिखाऊंगी और खुद को साबित करूंगी। आखिरकार मैंने ऐसा किया भी।”अभिनेत्री ने बताया कि धीरे-धीरे उनके परिवार का नजरिया भी बदलने लगा। उन्होंने कहा, “धीरे-धीरे मेरी मां भी मेरे फैसले को समझने लगीं। इसके बाद मेरी बहनों और दोस्तों का भी साथ मिला। सभी के सहयोग से ही मैं आज यहां तक पहुंची हूं।”
टेलीविजन के कई शोज में काम कर चुकीं ज्योति ने उन लोगों को भी सलाह दी, जो अभिनय की दुनिया में अपनी पहचान बनाना चाहते हैं। उनके मुताबिक, इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए लगातार मेहनत करना और खुद को बेहतर बनाना जरूरी है। उन्होंने बताया कि अपने करियर में उन्होंने भी कई ऑडिशन दिए और रिजेक्शन का सामना किया है।
ज्योति ने कहा, “सबसे पहले आपको खुद पर बहुत काम करना पड़ता है। मैंने भी कई ऑडिशन दिए हैं और रिजेक्शन झेले हैं। कभी-कभी बाद में एहसास हुआ कि मेरी हेयरस्टाइल जैसी छोटी-सी चीज भी सही नहीं थी।”
उनका मानना है कि ऑडिशन की तैयारी सिर्फ मेकअप करने और डायलॉग बोलने तक सीमित नहीं होती। कलाकार के लुक से लेकर उसकी एक्टिंग, डायलॉग डिलीवरी और कपड़ों तक, हर चीज मायने रखती है। उन्होंने कहा, “ऑडिशन की तैयारी का मतलब सिर्फ मेकअप करके परफॉर्म करना नहीं है। हर छोटी चीज महत्वपूर्ण होती है। आपके बाल, अभिनय, डायलॉग बोलने का तरीका और पहनावा, सभी की अहम भूमिका होती है। आपकी बातें स्पष्ट होनी चाहिए और आपको खुद को अच्छी तरह प्रस्तुत करना आना चाहिए, क्योंकि यह ग्लैमर इंडस्ट्री है।”
ज्योति ने यह भी स्वीकार किया कि कई बार अच्छी परफॉर्मेंस देने के बावजूद रिजेक्ट होना निराश कर सकता है। हालांकि, ऐसे अनुभव कलाकार को अपनी कमियों को समझने और उन पर काम करने का मौका देते हैं। उन्होंने कहा, “कई बार ऐसा हुआ है कि मुझे लगा कि मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दिया है, फिर भी मुझे रिजेक्ट कर दिया गया। इससे मुझे समझ आया कि सिर्फ एक्टिंग करना ही काफी नहीं है। आपको लगातार खुद को बेहतर बनाने की कोशिश भी करनी पड़ती है।”
टेलीविजन में काम पाने के तरीकों के बारे में बात करते हुए अभिनेत्री ने नए कलाकारों को प्रोडक्शन हाउस और कास्टिंग टीम से संपर्क बनाने की सलाह दी। उनके मुताबिक, इस क्षेत्र में अच्छे प्रोफेशनल रिश्ते बनाना और नए अवसरों के लिए तैयार रहना जरूरी है। उन्होंने कहा, “आप प्रोडक्शन हाउस से संपर्क कर सकते हैं और उनके साथ अच्छे प्रोफेशनल रिश्ते बना सकते हैं। कास्टिंग टीमों से भी जुड़ना चाहिए और काम के अवसरों को लेकर लचीला नजरिया रखना चाहिए। जैसे-जैसे आप काम करते हैं और लोगों के साथ अपने रिश्ते बनाते हैं, वैसे-वैसे आपके लिए नए अवसर आने की संभावना भी बढ़ती है।”
अभिनेत्री ने ऑडिशन की प्रक्रिया के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि हर प्रोडक्शन हाउस में ऑडिशन का तरीका थोड़ा अलग हो सकता है, लेकिन आमतौर पर वहां कैमरा ऑपरेटर और कास्टिंग या प्रोडक्शन टीम का कोई सदस्य मौजूद होता है। कलाकार को एक स्क्रिप्ट दी जाती है और हरे या नीले बैकग्राउंड के सामने उसे परफॉर्म करना होता है।
ज्योति के मुताबिक, शुरुआत में ऑडिशन देना थोड़ा मुश्किल लग सकता है, लेकिन अनुभव के साथ कलाकार का आत्मविश्वास बढ़ता है। उन्होंने कहा, “शुरुआत में आपको काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, लेकिन जैसे-जैसे आप काम करते रहते हैं, आपका आत्मविश्वास बढ़ता है और आप पहले से ज्यादा बेहतर हो जाते हैं। धीरे-धीरे आप इस पूरी प्रक्रिया के अभ्यस्त हो जाते हैं।”
ऑडिशन के दौरान कई बार कलाकार के सामने कोई को-एक्टर नहीं होता, ऐसे में अकेले परफॉर्म करना भी एक चुनौती बन जाता है। इस बारे में ज्योति ने कहा, “यह स्क्रिप्ट पर निर्भर करता है। अगर आपको परफॉर्म करने के लिए सिर्फ एक पैराग्राफ दिया गया है और उसमें केवल आपके डायलॉग लिखे हैं, तो आपको अपनी परफॉर्मेंस में अलग-अलग भाव और मूड लाने होते हैं। एक कलाकार के तौर पर हमें समझना पड़ता है कि कहां रुकना है, कब आवाज ऊंची करनी है और कब धीमी रखनी है। ये छोटी-छोटी बातें परफॉर्मेंस को स्वाभाविक बनाती हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “कई बार ऑडिशन में हमारे सामने कोई दूसरा कलाकार नहीं होता। ऐसे में हमें सामने वाले व्यक्ति की कल्पना करके परफॉर्म करना पड़ता है। हम अपनी आंखों की गतिविधियों का इस्तेमाल कर सकते हैं और दाएं या बाएं देखकर ऐसा दिखा सकते हैं, जैसे कोई व्यक्ति हमारे सामने खड़ा हो। यह सब अभ्यास से आता है।”
अपने अनुभवों का जिक्र करते हुए ज्योति ने कहा कि टेलीविजन इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने के लिए धैर्य और मेहनत दोनों जरूरी हैं। उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि टेलीविजन इंडस्ट्री में कदम रखने के लिए बहुत धैर्य और मेहनत की जरूरत होती है। मैंने भी रिजेक्शन का सामना किया है, लेकिन हर अनुभव आपको कुछ न कुछ सिखाता है। मेरे पिता के समर्थन ने मुझे अपने सपने को पूरा करने का आत्मविश्वास दिया। मैं नए कलाकारों से यही कहना चाहूंगी कि वे खुद पर काम करते रहें, अपनी गलतियों से सीखें और सिर्फ रिजेक्शन मिलने की वजह से हार न मानें।”
Scan & Donate >


