दशहरे का दिन नई शुरुआत के लिए शुभ है, लेकिन सही मुहूर्त का चुनाव भी जरूरी है, कहते हैं ज्योतिषी आशुतोष क्लेयरवॉयंट - Manoranjan Metro

    दशहरे का त्योहार आते ही कई लोग कोई नया काम शुरू करने, जरूरी खरीदारी करने या जिंदगी में नई शुरुआत करने की योजना बनाते हैं। ज्योतिषी आशुतोष क्लेयरवॉयंट के अनुसार, दशहरा नई शुरुआत के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इसे हिंदू पंचांग के साढ़े तीन मुहूर्तों में से एक माना गया है। मान्यता है कि इन शुभ दिनों में कोई भी अच्छा काम शुरू करने के लिए अलग से मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं होती।

    साल 2026 में दशहरे के महत्व के बारे में बात करते हुए आशुतोष क्लेयरवॉयंट कहते हैं, “दशहरा कुछ नया शुरू करने के लिए सबसे शुभ दिनों में से एक है। अगर आप नया बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, नई नौकरी जॉइन करना चाहते हैं, प्रॉपर्टी बुक करना चाहते हैं, गाड़ी या सोना खरीदना चाहते हैं या अपने बच्चे की पढ़ाई की शुरुआत करना चाहते हैं, तो यह दिन बहुत खास है। इस साल 20 अक्टूबर को पड़ने वाला विजय मुहूर्त उन लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है, जो किसी नए काम की शुरुआत करने की योजना बना रहे हैं।”

    वह आगे बताते हैं कि इस साल ग्रहों की स्थिति भी विजयादशमी के महत्व को बढ़ाती है। उनके अनुसार, शुभ समय के दौरान चंद्रमा का श्रवण नक्षत्र में होना इस अवसर को महत्वपूर्ण कार्यों के लिए अनुकूल बनाता है। हालांकि, वह लोगों को सलाह देते हैं कि किसी भी काम के लिए समय का ध्यान जरूर रखें और यह न मानें कि दिन का हर समय हर तरह के काम के लिए समान रूप से शुभ होता है।

    वह कहते हैं, “नई शुरुआत के लिए यह बहुत अच्छा समय है और लोगों को त्योहार से जुड़ी सकारात्मक ऊर्जा का लाभ उठाना चाहिए। चाहे कोई पेशेवर फैसला हो, पैसों से जुड़ा मामला हो या जिंदगी का कोई खास पड़ाव, दशहरा लोगों को विश्वास और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का अवसर देता है।”

    आशुतोष दशहरे को लेकर प्रचलित कुछ गलतफहमियों के बारे में भी बात करते हैं। इनमें से एक यह है कि जब पूरा दिन शुभ माना जाता है, तो किसी भी समय पूजा करना या खरीदारी करना सही होता है। वह बताते हैं कि दशहरा शुभ दिन जरूर है, लेकिन विजय मुहूर्त का अपना विशेष महत्व है। इसलिए पूजा, समारोह या किसी बड़े लेन-देन की योजना बनाने से पहले अपने शहर के अनुसार मुहूर्त का समय जरूर देखना चाहिए।

    वह एक और गलतफहमी के बारे में बताते हैं। कई लोग मानते हैं कि अगर कोई ग्रह वक्री चाल चल रहा है, तो त्योहार का शुभ प्रभाव कम हो जाता है। आशुतोष के अनुसार, ग्रहों की वक्री चाल से दशहरे का महत्व खत्म नहीं होता। हालांकि, ऐसी स्थिति में कुछ फैसले सोच-समझकर लेने चाहिए, खासकर जब बात महंगी खरीदारी या लंबे समय की जिम्मेदारियों की हो।

    वह कहते हैं, “किसी ग्रह के वक्री होने पर लोगों को डरने की जरूरत नहीं है। दशहरा आज भी एक शुभ अवसर है, लेकिन ज्योतिष हमें सोच-समझकर फैसले लेना भी सिखाता है। जब भी कोई कीमती चीज खरीदें, तो कुछ समय के ट्रेंड को देखकर फैसला लेने के बजाय यह सोचें कि वह चीज लंबे समय में आपके लिए कितनी उपयोगी होगी।”

    घर पर किए जा सकने वाले एक आसान उपाय के बारे में बताते हुए आशुतोष विजय मुहूर्त में मां दुर्गा को नवरात्रि के दौरान उगाए गए जौ के जवारे अर्पित करने की सलाह देते हैं। इसके लिए भक्त मां के सामने घी का दीपक जला सकते हैं, लाल फूल चढ़ा सकते हैं और उनके चरणों में कुछ जवारे अर्पित कर सकते हैं। जिन लोगों ने नवरात्रि में जौ नहीं उगाए हैं, वे इसके स्थान पर चावल के दाने या शमी के पत्ते चढ़ा सकते हैं। इसके साथ ही वह मां दुर्गा को समर्पित पारंपरिक मंत्र या प्रार्थना का 11 बार जाप करने की सलाह भी देते हैं।

    वह कहते हैं, “नवरात्रि के नौ दिनों में पूजा के पात्र में उगने वाले जवारे मां दुर्गा के आशीर्वाद की याद दिलाते हैं। इन्हें श्रद्धा के साथ मां को अर्पित करें और आने वाले साल में विश्वास और सकारात्मकता के प्रतीक के रूप में कुछ जवारे अपने पास सुरक्षित रखें।”

    त्योहार के गहरे अर्थ पर बात करते हुए आशुतोष क्लेयरवॉयंट कहते हैं कि दशहरा सिर्फ बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव नहीं है, बल्कि यह जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने, अपनी चुनौतियों पर काबू पाने और विश्वास के साथ आगे बढ़ने का भी संदेश देता है। वह लोगों को सलाह देते हैं कि इस अवसर पर अपने लक्ष्यों के बारे में सोचें, ईश्वर का आशीर्वाद लें और स्पष्ट सोच व आत्मविश्वास के साथ जीवन के नए अध्याय की शुरुआत करें।

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