अभिनेता अरुण मंडोला ने हाल ही में मुंबई में हुए स्टेज प्रोडक्शन रामायण मंचन में श्रीराम की भूमिका निभाई। इससे पहले वह संकट मोचन महाबली हनुमान और विघ्नहर्ता गणेश में लक्ष्मण के किरदार में नजर आए थे। अभिनय के अलावा अरुण मानसिक स्वास्थ्य और मन की शांति बनाए रखने को भी काफी अहमियत देते हैं।
लोगों को अपनी परेशानियां स्वीकार करने में मुश्किल क्यों होती है, इस बारे में बात करते हुए अरुण कहते हैं, “बचपन से हमें सिखाया जाता है कि कभी हार नहीं माननी चाहिए, लेकिन हमें अपनी कमजोरियों और भावनाओं को जाहिर करना नहीं सिखाया जाता। समाज अक्सर ‘मैं ठीक नहीं हूं’ कहने को कमजोरी समझ लेता है, जिसके कारण लोग अपना दर्द छिपाने लगते हैं। सच तो यह है कि अपनी सच्चाई कहने की हिम्मत दिखाना, चेहरे पर झूठी मुस्कान रखने से कहीं ज्यादा ताकत मांगता है।”
लोगों की नजरों में रहने के साथ लगातार आलोचनाओं और सवालों का सामना करना भी पड़ता है। अरुण के मुताबिक, मानसिक शांति बनाए रखने के लिए यह सीखना जरूरी है कि हर किसी की राय को खुद पर हावी न होने दिया जाए। वह कहते हैं, “लोगों की नजरों में रहने का मतलब यह नहीं है कि आप हर किसी की राय से प्रभावित होने लगें। मैं गैरजरूरी बातों को नजरअंदाज करके और अपने काम तथा करीबी लोगों पर ध्यान देकर अपनी मानसिक शांति बनाए रखता हूं।”मुंबई जैसे तेज रफ्तार शहर में काम करना आसान नहीं है। लंबे शूटिंग शेड्यूल और लगातार बनी रहने वाली व्यस्तता के बीच खुद के लिए समय निकालना मुश्किल हो सकता है। अरुण का मानना है कि पूरी तरह थक जाने के बाद संभलने के बजाय शुरुआत में ही बर्नआउट के संकेतों को पहचानना जरूरी है। वह बताते हैं, “मुंबई जैसे तेज रफ्तार शहर में बर्नआउट से बचना मुश्किल है। मैं पहले से सोच-समझकर अपनी योजनाएं बनाता हूं और ऐसे प्रोजेक्ट्स से बचता हूं, जिनकी मुझे जरूरत नहीं है। जब काम मेरी मानसिक स्पष्टता को प्रभावित करने लगता है, तो मैं समझ जाता हूं कि अब थोड़ा रुकने और खुद को फिर से तरोताजा करने का समय आ गया है।”
निजी और पेशेवर जिंदगी में उम्मीदों पर खरा उतरने का दबाव भी कई बार मानसिक थकान बढ़ा देता है। अभिनेता का कहना है कि समय के साथ उन्होंने अपनी सीमाएं तय करना सीख लिया है। वह कहते हैं, “लंबे समय तक शूटिंग करना और लगातार अच्छा प्रदर्शन करने का दबाव आपको मानसिक रूप से थका सकता है। पिछले कुछ वर्षों में मैंने अपनी सीमाएं तय करना सीख लिया है। दूसरों की उम्मीदों को पूरा करने की कोशिश में लगे रहने के बजाय अपनी सेहत को प्राथमिकता देना ही मेरे लिए इस दबाव को संभालने का तरीका है।”
अरुण के लिए मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा एक और अहम सबक यह रहा है कि अपनी कमजोरियों और परेशानियों के बारे में किससे बात करनी चाहिए। उनका मानना है कि हर किसी के सामने अपनी भावनाएं जाहिर करने के बजाय सही लोगों पर भरोसा करना ज्यादा जरूरी है। वह कहते हैं, “मैंने सबसे बड़ी बात यह सीखी है कि आपको चुनिंदा लोगों के सामने ही खुलकर बात करनी चाहिए। अपना दर्द पूरी दुनिया के साथ साझा करने से कोई फायदा नहीं होता। अपनी कमजोरियों और भावनाओं को परिवार और उन भरोसेमंद दोस्तों तक ही सीमित रखें, जो आपको सच में समझते हैं।”
अभिनेता यह भी मानते हैं कि ‘ना’ कहना सीखने से उनकी जिंदगी में काफी बदलाव आया है। पहले वह दूसरों को निराश करने से बचने के लिए कई बातों के लिए हामी भर देते थे, लेकिन धीरे-धीरे उन्हें एहसास हुआ कि अपनी सेहत और समय को प्राथमिकता देना भी जरूरी है। अरुण कहते हैं, “अपनी मानसिक शांति के लिए ‘ना’ कहना सीखना बहुत जरूरी रहा है। पहले मैं दूसरों को निराश करने से बचने के लिए हर बात पर हां कह देता था, लेकिन अब मुझे समझ आ गया है कि मेरी सेहत और मेरा समय सबसे पहले आते हैं। जब जरूरत होती है, तब ना कहने से मेरी जिंदगी में सुकून आया है। मैंने अपने दोस्तों का दायरा भी सीमित कर लिया है और ऐसे लोगों से दूरी रखता हूं, जो मेरी ऊर्जा खत्म करते हैं और मेरा कीमती समय बर्बाद करते हैं।”
अरुण को अरबपति निवेशक वॉरेन बफेट से जुड़ा एक कथन भी याद है, जिसने दोस्ती और संगति को लेकर उनकी सोच बदल दी। वह बताते हैं, “कुछ साल पहले मैंने वॉरेन बफेट की तस्वीर पर एक कथन पढ़ा था, जिसमें लिखा था, ‘मुझे अपने पांच दोस्तों के बारे में बताओ और मैं तुम्हारा भविष्य बता दूंगा।’ शुरुआत में मुझे लगा कि वह कोई ज्योतिषी होंगे, लेकिन बाद में उनके बारे में पढ़ा तो पता चला कि वह दुनिया के सबसे अमीर लोगों में से एक हैं। कुछ साल बाद उस कथन ने मेरी जिंदगी पूरी तरह बदल दी।”
सोशल मीडिया भी एक ऐसी जगह है, जहां खुश, सफल और हमेशा सक्रिय दिखने का दबाव लोगों की मानसिक शांति को प्रभावित कर सकता है। अरुण कहते हैं कि शुरुआती दिनों में वह भी दूसरों की तारीफ और स्वीकृति को अहमियत देते थे, लेकिन अब उनकी सोच बदल गई है। वह कहते हैं, “शुरुआत में मैं भी इस बात की परवाह करता था कि दूसरे मेरे बारे में क्या सोचते हैं, लेकिन हर किसी को प्रभावित करने की कोशिश करना बचकानी बात है। अपने काम के बारे में सोशल मीडिया पर जानकारी देना ठीक है, लेकिन खुशी का दिखावा करने से आपकी मानसिक शांति छिन सकती है। अब मैं सोशल मीडिया का इस्तेमाल सिर्फ अपने काम के लिए करता हूं, लोगों से तारीफ पाने के लिए नहीं। पिछले कुछ वर्षों में मैं सोशल मीडिया पर बहुत कम सक्रिय रहा हूं और मैंने वहां बहुत कम चीजें पोस्ट की हैं।”
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