लाइक्स और कमेंट्स से तय नहीं होती मेरी अहमियत : डेलनाज ईरानी - Manoranjan Metro

    मुंबई। अभिनेत्री डेलनाज ईरानी का मानना है कि हमेशा हंसते-मुस्कुराते नजर आने वाले कलाकारों के लिए अपनी भावनात्मक परेशानियों को जाहिर करना कई बार मुश्किल हो जाता है। पर्दे पर अपने चुलबुले अंदाज और यादगार किरदारों से दर्शकों का मनोरंजन करने वाली डेलनाज इन दिनों धारावाहिक चुंबक में गुलशन तरापोरवाला की भूमिका निभा रही हैं। उनका कहना है कि लोगों को अक्सर लगता है कि जो कलाकार पर्दे पर हमेशा खुश दिखाई देता है, वह वास्तविक जीवन में भी वैसा ही होगा। जबकि हर इंसान की जिंदगी में मुश्किल दौर आते हैं और अपनी भावनाओं को स्वीकार करना भी जरूरी है।

    डेलनाज के मुताबिक, स्वीटू जैसे लोकप्रिय किरदारों और हास्य भूमिकाओं के कारण दर्शक उनसे हमेशा मुस्कुराते रहने की उम्मीद करते हैं। ऐसे में अपनी परेशानी जाहिर करने पर लोगों के फैसले का डर बना रहता है। उन्होंने कहा कि कई बार लोग कमजोर समझे जाने या अपनी परेशानी को बढ़ा-चढ़ाकर बताने का आरोप लगने के डर से अपनी तकलीफ छिपा लेते हैं। हालांकि, अपनी भावनाओं को स्वीकार करना कमजोरी नहीं, बल्कि साहस की बात है।

    अभिनेत्री ने बताया कि मनोरंजन जगत में कलाकारों को केवल अपने काम के लिए ही नहीं, बल्कि उनके रूप-रंग, वजन और निजी फैसलों के लिए भी लगातार आंका जाता है। समय के साथ उन्होंने दूसरों की राय को खुद पर हावी नहीं होने देना सीखा है। उनके अनुसार, लोगों की राय बदलती रहती है, लेकिन अपनी नजरों में खुद की अहमियत बनाए रखना जरूरी है। वह अपने परिवार, साथी और सच्चे दोस्तों के साथ समय बिताकर मानसिक शांति बनाए रखने की कोशिश करती हैं। उनके लिए यह जानना अधिक महत्वपूर्ण है कि करीबी लोग उन्हें एक इंसान के रूप में स्वीकार करते हैं, न कि केवल एक अभिनेत्री के तौर पर।

    काम के प्रति लगाव के कारण कई बार थकान को पहचानना भी मुश्किल हो जाता है। डेलनाज का कहना है कि लगातार थकान महसूस होना, छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन आना और रोजमर्रा की गतिविधियों में खुशी न मिलना इस बात के संकेत हो सकते हैं कि अब थोड़ा रुकने की जरूरत है। ऐसे समय में वह खुद को आराम देने, काम से कुछ दूरी बनाने और मानसिक रूप से सहज होने पर ध्यान देती हैं।

    पेशेवर जिम्मेदारियों और सामाजिक अपेक्षाओं के बीच संतुलन बनाने को लेकर डेलनाज ने कहा कि वर्षों तक काम करने के बाद भी दबाव पूरी तरह खत्म नहीं होता। चुंबक जैसे बड़े प्रोजेक्ट में काम करते समय बेहतर प्रदर्शन करने की जिम्मेदारी रहती है। वहीं, महिलाओं से जुड़ी सामाजिक अपेक्षाएं भी कई बार दबाव पैदा करती हैं। उन्होंने कहा कि अब वह सभी को खुश करने की कोशिश करने के बजाय अपनी खुशी और संतुष्टि को महत्व देती हैं। उनके लिए सफलता का पैमाना दूसरों की अपेक्षाएं नहीं, बल्कि खुद का संतोष है।

    डेलनाज मानती हैं कि जिंदगी हमेशा एक जैसी नहीं रहती और कठिन दौर भी इंसान को कई महत्वपूर्ण सबक सिखाते हैं। उनके अनुसार, मानसिक रूप से बेहतर महसूस करने की प्रक्रिया में समय लगता है और जरूरत पड़ने पर मदद मांगने में संकोच नहीं करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बाहरी परिस्थितियां हमेशा हमारे नियंत्रण में नहीं होतीं, इसलिए अपने भीतर स्थिरता और संतुलन तलाशना जरूरी है।

    अभिनेत्री के मुताबिक, अपने आत्मसम्मान और मानसिक शांति की रक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर ‘न’ कहना भी सीखना चाहिए। करियर के शुरुआती दौर में वह कई बार दूसरों को खुश रखने या काम के अवसर बनाए रखने के लिए ऐसी जिम्मेदारियां भी स्वीकार कर लेती थीं, जिनसे उन्हें परेशानी होती थी। अब वह अपने काम और निजी जीवन से जुड़े फैसले सोच-समझकर लेती हैं। उनका मानना है कि अगर किसी फैसले की कीमत अपनी मानसिक शांति गंवाना है, तो उस पर दोबारा विचार करना चाहिए।

    सोशल मीडिया के बारे में डेलनाज ने कहा कि यह कलाकारों को प्रशंसकों से जुड़ने का अवसर देता है, लेकिन इसके जरिए जिंदगी की एक ऐसी तस्वीर भी सामने आती है, जो अक्सर वास्तविकता से अलग होती है। वह समय-समय पर सोशल मीडिया से दूरी बनाती हैं और अपने निजी जीवन तथा पर्दे की छवि के बीच स्पष्ट अंतर रखती हैं। उन्होंने कहा कि प्रशंसकों का प्यार अच्छा लगता है, लेकिन लाइक्स और कमेंट्स की संख्या यह तय नहीं कर सकती कि वह खुद को कितना महत्व देती हैं। उनके अनुसार, मानसिक शांति और आत्मसम्मान को दूसरों की प्रतिक्रिया पर निर्भर नहीं होना चाहिए।

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