टेलीविजन, म्यूजिक वीडियो और डिजिटल मंच पर अपनी पहचान बना चुके अभिनेता अमल सहरावत का मानना है कि नवरात्रि केवल पूजा-पाठ और उत्सव का पर्व नहीं, बल्कि आत्ममंथन, कृतज्ञता और जीवन के मूल्यों से जुड़े रहने का अवसर भी है। उनके अनुसार, यह पर्व व्यक्ति को अपनी नकारात्मकता पर काबू पाने, विनम्र बने रहने और व्यस्त दिनचर्या के बीच परिवार के लिए समय निकालने की प्रेरणा देता है।
कलर्स टीवी के धारावाहिक ‘छोटी सरदारनी’ में जग्गा और स्टार प्लस के ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ में संग्राम सिंह की भूमिका निभा चुके अमल सहरावत ने अपने करियर में कई तरह के प्रोजेक्ट किए हैं। मॉडलिंग से अभिनय की दुनिया तक के उनके सफर में लोकप्रिय गीत ‘सैय्यां’ से जुड़ाव भी एक महत्वपूर्ण पड़ाव रहा है। इसके अलावा वह विक्रम भट्ट की ‘अनटचेबल्स’, हबीब फैसल की ‘होम’ और अपूर्व लाखिया की वेब सीरीज ‘क्रैकडाउन’ में भी नजर आ चुके हैं।
आज के दौर में बुराई पर अच्छाई की जीत के मायने बताते हुए अमल ने कहा कि इसकी शुरुआत व्यक्ति के भीतर से होती है। अपने अहंकार, नकारात्मक विचारों और डर पर विजय पाना तथा मुश्किल होने के बावजूद सही रास्ता चुनना ही वास्तविक जीत है। उनके मुताबिक, जीवन में हर परिस्थिति या व्यक्ति को नियंत्रित करना संभव नहीं होता, लेकिन हम अपनी प्रतिक्रिया और व्यवहार को जरूर नियंत्रित कर सकते हैं। यदि इरादे साफ हों और व्यक्ति जमीन से जुड़ा रहे, तो अच्छाई अपना रास्ता बना ही लेती है।
अमल के लिए त्योहारों की सबसे खूबसूरत बात घर और बचपन की यादों से जुड़ना है। परिवार के साथ बिताए गए साधारण पल, घर का माहौल, प्रार्थना और त्योहारों का उत्साह उन्हें खास लगते हैं। उन्होंने कहा कि उम्र बढ़ने और जिंदगी व्यस्त होने के साथ यह एहसास होता है कि बचपन के छोटे-छोटे पल ही अक्सर सबसे अनमोल होते हैं। कई बार प्रार्थना की आवाज या त्योहार का माहौल ही अपनों के साथ बिताए उन दिनों की याद दिलाने के लिए काफी होता है।
आने वाली पीढ़ी तक परंपराएं पहुंचाने के सवाल पर अमल का कहना है कि बच्चों को त्योहारों के पीछे छिपे मूल्यों और उनके महत्व को समझना चाहिए। वह चाहते हैं कि नई पीढ़ी शुभ दिनों की शुरुआत प्रार्थना, कृतज्ञता और बड़ों के सम्मान के साथ करना सीखे। उनके अनुसार, त्योहार केवल रस्में निभाने या खुशियां मनाने तक सीमित नहीं होने चाहिए। बच्चों को अपनी संस्कृति की सराहना करने, सभी जीवों का सम्मान करने और दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार करने का महत्व भी समझना चाहिए।
मनोरंजन जगत में लंबे कामकाजी घंटे और घर से दूर रहने की मजबूरी के बीच अमल परिवार के साथ बिताए समय को बेहद महत्वपूर्ण मानते हैं। उन्होंने कहा कि पेशेवर सफलता का वास्तविक महत्व तभी है, जब व्यक्ति अपने प्रियजनों के लिए भी समय निकाल सके। परिवार के साथ त्योहार मनाने से उन्हें अपनी जड़ों से जुड़े रहने का एहसास होता है। यह समय उन्हें याद दिलाता है कि पर्दे पर निभाई जाने वाली भूमिकाओं और पेशेवर उपलब्धियों से अलग भी उनकी अपनी पहचान और रिश्ते हैं। उनके लिए अपनों के साथ बिताए पल अनमोल हैं और वह इन्हें कभी हल्के में नहीं लेते।
नवरात्रि से मिलने वाली सीख को रोजमर्रा की जिंदगी में अपनाने के लिए अमल ध्यान का सहारा लेते हैं। उनका मानना है कि मन की शांति व्यक्ति को बाहरी चुनौतियों का सामना अधिक स्पष्टता से करने में मदद करती है। उन्होंने कहा कि नवरात्रि उन्हें कृतज्ञता बनाए रखने और अपने विचारों व इरादों को शुद्ध रखने की याद दिलाती है।
अमल के अनुसार, शक्ति का अर्थ हमेशा आक्रामक होना या अपनी बात साबित करना नहीं है। कई बार धैर्य, विनम्रता, आत्मअनुशासन और विपरीत परिस्थितियों में भी दूसरों के प्रति दयालु बने रहना ही वास्तविक ताकत होती है। उनका मानना है कि नवरात्रि का संदेश तभी सार्थक होता है, जब व्यक्ति इसे अपने व्यवहार और रोजमर्रा के जीवन में उतारे।
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