हमारे अंदर कुछ बदल गया: ‘शिव शक्ति’ में नारद की भूमिका निभाने पर कल्याण मृणाल चौधरी- Manoranjan Metro

    ‘शिव शक्ति: एक दिव्य प्रेम कथा’ में नारद की भूमिका निभा रहे कल्याण मृणाल चौधरी का मानना है कि इस नाटक ने दर्शकों तक पहुंचने से पहले ही इसकी पूरी टीम को बदल दिया। उनके लिए यह सिर्फ एक पौराणिक नाटक नहीं है, बल्कि एक ऐसा अनुभव है जिसने कलाकारों को अपनी आध्यात्मिकता से जुड़ने का मौका दिया।

    वह कहते हैं, “शिव शक्ति व्यावसायिक थिएटर में होने वाले दूसरे पौराणिक नाटकों में से एक हो सकता था। लेकिन रिहर्सल के दौरान हम कलाकार पूरी तरह अलग इंसान बन गए। हमारे अंदर कुछ बदल गया।”

    इस बदलाव के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, “हम आध्यात्मिक रूप से जुड़ने लगे और अपने भीतर के ईश्वर से हमारा जुड़ाव हुआ। दर्शक मंच पर एक अलग ही दुनिया का अनुभव करेंगे।”

    कल्याण का मानना है कि नारद की भूमिका उनके पास किसी खास वजह से आई है। वह कहते हैं, “मैं ‘शिव शक्ति’ नाटक में नारद की भूमिका निभा रहा हूं। मेरा मानना है कि इस भूमिका ने मुझे चुना है।”

    यह किरदार लोगों से जुड़ने और उन्हें सहज महसूस कराने की उनकी सोच से भी मेल खाता है। वह कहते हैं, “मुझे लोगों से जुड़ना बहुत पसंद है। मैं प्रार्थना करता हूं कि लोग मेरे आसपास सहज महसूस करें। अगर कोई उदास है या डिप्रेशन से गुजर रहा है, तो मैं सोचता हूं कि मेरा व्यवहार किस तरह उसका दर्द कम कर सकता है।” इस अनुभव ने उनके व्यक्तिगत विकास में भी योगदान दिया है। वह आगे कहते हैं, “नारद की भूमिका मुझे एक बेहतर इंसान बनने में मदद कर रही है।”

    इस किरदार की तैयारी के लिए उन्होंने धार्मिक ग्रंथों का सहारा लिया, खासकर नारद पुराण का अध्ययन किया। वह चाहते हैं कि किरदार को निभाते समय मूल ग्रंथों की बातों का सम्मान भी बना रहे और दर्शकों की नारद को लेकर पहले से बनी समझ का भी ध्यान रखा जाए।

    वह कहते हैं, “मैंने नारद पुराण का अध्ययन किया, जिसमें निश्चित रूप से अलग-अलग दृष्टिकोण मिलते हैं। मैं दर्शकों की नारद को लेकर पहले से बनी धारणा और धार्मिक ग्रंथ के प्रति प्रामाणिकता के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश करूंगा।”

    कल्याण के लिए संगीत भी मंच और दर्शकों के बीच भावनात्मक जुड़ाव बनाने में अहम भूमिका निभाता है। उनका मानना है कि थिएटर का सामूहिक अनुभव लोगों को उन भावनाओं को व्यक्त करने का मौका देता है, जिन्हें वे अक्सर अपने भीतर दबाकर रखते हैं।

    वह कहते हैं, “हम इंसान अक्सर समाज की स्वीकृति पाने के लिए अपनी भावनाओं को दबा देते हैं। इसलिए हम सामूहिक रूप से नाटक देखने जाते हैं, जहां गाने, संगीत और खूबसूरत दृश्यों के साथ मिलकर हमारी दबी हुई भावनाएं बाहर आती हैं। इससे हम बिना किसी के जज करने के डर के एक साथ रो और हंस पाते हैं।”

    पौराणिक कहानी होने के बावजूद कल्याण ‘शिव शक्ति’ को आज के रिश्तों के लिए भी एक महत्वपूर्ण सीख मानते हैं। उनका कहना है, “यह बहुत खूबसूरत सवाल है। यह कालजयी कहानी किसी भी खुशहाल रिश्ते के लिए एक मार्गदर्शिका की तरह है।”

    उनका मानना है कि जब हम अपने भीतर और दूसरों में भी ईश्वर के स्वरूप को पहचानने लगते हैं, तो हमारे अंदर दूसरों के प्रति सम्मान और समझ बढ़ती है।

    कल्याण कहते हैं, “जितनी जल्दी हम यह समझ जाएंगे कि शिव और शक्ति हमारे भीतर ही हैं और हर व्यक्ति के अंदर उनका वास है, उतना ही हम हर इंसान का सम्मान करना सीखेंगे। चाहे वे हमारी पत्नियां हों, मां हों या बहनें, जो घर में शक्ति का साक्षात रूप बनकर हमारे जीवन को संभालती हैं। जब हम इस बात को समझेंगे, तो हमारा जीवन कई गुना बेहतर और समृद्ध हो जाएगा।”

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