टैरो रीडर और टेलीविजन पर्सनैलिटी मुनीषा खटवानी दशहरे के मौके पर उन मूल्यों के बारे में बात करती हैं, जो उनकी निजी और पेशेवर जिंदगी में अहम भूमिका निभाते हैं। उनके लिए ईमानदारी सबसे जरूरी है और वह अपने काम के साथ-साथ रिश्तों में भी इसे बनाए रखने की कोशिश करती हैं।
उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि हर समय ईमानदार रहना बहुत जरूरी है। अगर मुझे लगता है कि मैं अपनी बात पूरी तरह से स्पष्ट नहीं कर पाई हूं, तो मैं उसे समझाने और पूरी पारदर्शिता बनाए रखने की कोशिश करती हूं। मुझे ईमानदारी और सही तरीके से काम करना पसंद है।”
उनके पेशे में भी कई चुनौतियां आती हैं, खासकर तब जब लोग उनसे ऐसे जवाबों की उम्मीद करते हैं, जो उनकी इच्छाओं के मुताबिक हों। इस बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, “मेरे लिए सबसे बड़ी चुनौती लोगों को वह बात बताना होती है, जो वे सुनना नहीं चाहते। जब लोग किसी ज्योतिषी के पास आते हैं, तो वे अक्सर वही सुनने की उम्मीद करते हैं, जो वे सुनना चाहते हैं, न कि कोई कड़वी सच्चाई।”
ईमानदारी के अलावा, मुनीषा चाहती हैं कि लोग रोजमर्रा की जिंदगी में बुनियादी शिष्टाचार को फिर से महत्व देना शुरू करें। उनका मानना है कि मैसेज का जवाब देना, फोन उठाना और दूसरों से सम्मान के साथ बात करना छोटी-छोटी बातें हैं, लेकिन इनका काफी महत्व है।
उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि बहुत से लोग जानबूझकर खुद को दूसरों के लिए उपलब्ध नहीं रखते, जो मुझे काफी गलत लगता है। अगर कोई आपसे किसी भी तरह संपर्क कर रहा है, तो उसके पीछे कोई वजह होती है। इसलिए मैं चाहती हूं कि लोग बुनियादी शिष्टाचार को फिर से अपनाएं।”
अपने करियर में आगे बढ़ते हुए मुनीषा खुद को याद दिलाती रहती हैं कि सफलता और मुश्किल दौर, दोनों ही हमेशा नहीं रहते। उनका मानना है कि जब जिंदगी में सब कुछ अच्छा चल रहा हो, तब विनम्र बने रहना और भी जरूरी हो जाता है, क्योंकि परिस्थितियां कभी भी बदल सकती हैं। उनके अनुसार, जमीन से जुड़े रहना उन्हें अच्छे और बुरे, दोनों समय में आगे बढ़ने की ताकत देता है।
अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी लड़ाई के बारे में बात करते हुए मुनीषा ईमानदारी और आध्यात्मिकता के बीच के संबंध को अहम मानती हैं। उन्होंने कहा, “अब तक मैंने जो सबसे बड़ी लड़ाई लड़ी है, वह ईमानदारी और आध्यात्मिकता की लड़ाई है। ये दोनों चीजें मुझे जमीन से जुड़े रहने और आगे बढ़ते रहने की ताकत देती हैं।”
मुनीषा के मुताबिक, सबसे मुश्किल लड़ाइयां अक्सर इंसान को खुद के भीतर लड़नी पड़ती हैं, खासकर तब जब मन में खुद को लेकर संदेह पैदा होने लगता है। उन्होंने कहा, “मुझे ऐसा नहीं लगता कि मुझे किसी बुराई पर काबू पाना है, लेकिन आमतौर पर मैं यही कहूंगी कि हमारा सबसे बड़ा दुश्मन हमारा अपना मन होता है। जब कोई भी आपके साथ न हो, तब भी खुद पर और अपने विचारों पर विश्वास बनाए रखना ही सबसे ज्यादा मायने रखता है।”
Scan & Donate >

