मुंबई। ‘ओ हमनवा तुम देना साथ मेरा’ में आराध्या की भूमिका से दर्शकों के बीच पहचान बना रहीं अभिनेत्री एश्वर्या राज भकुनी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डीपफेक तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि तकनीक अपने आप में समस्या नहीं है, बल्कि उसके इस्तेमाल की मंशा महत्वपूर्ण है। रचनात्मक और जिम्मेदार इस्तेमाल से एआई उपयोगी साबित हो सकता है, लेकिन किसी को धोखा देने, परेशान करने, गलत सूचना फैलाने या उसकी पहचान को नुकसान पहुंचाने में इसका इस्तेमाल खतरनाक हो सकता है।
एश्वर्या के मुताबिक डीपफेक को लेकर चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि एआई आधारित तकनीक अब पहले की तुलना में काफी आसानी से उपलब्ध है। पहले किसी वास्तविक दिखने वाली सामग्री को तैयार करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञता जरूरी होती थी, लेकिन अब आम लोग भी ऐसे उपकरणों का इस्तेमाल कर सकते हैं। अभिनेत्री ने कहा कि कलाकारों के चेहरे, आवाज और काम का बड़ा हिस्सा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रहता है, इसलिए इनके गलत इस्तेमाल की आशंका बनी रहती है।
महाराष्ट्र सरकार के साथ साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियानों से जुड़े अपने अनुभव का जिक्र करते हुए एश्वर्या ने कहा कि तकनीक तेजी से बदल रही है और लोगों के लिए उसके साथ बदलते जोखिमों को समझना जरूरी है। उनका मानना है कि डिजिटल जागरूकता और जिम्मेदार व्यवहार को लेकर लगातार लोगों को जानकारी दी जानी चाहिए।
अभिनेत्री ने कहा कि डीपफेक के बढ़ते मामलों ने उनकी अपनी डिजिटल मौजूदगी को लेकर भी सोच बदली है। कलाकारों की तस्वीरें, साक्षात्कार, वीडियो और आवाज इंटरनेट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रहती हैं। पहले इंटरनेट पर किसी का वीडियो देखकर उसे वास्तविक मान लेना स्वाभाविक था, लेकिन अब वह खुद भी ऑनलाइन दिखाई देने वाली सामग्री पर विश्वास करने से पहले दो बार सोचती हैं।
एश्वर्या ने कहा कि यह समस्या केवल कलाकारों या चर्चित लोगों तक सीमित नहीं है। यदि किसी अभिनेता की तस्वीर या आवाज का गलत इस्तेमाल हो सकता है, तो आम व्यक्ति के लिए स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि उसे डिजिटल सामग्री में किए गए बदलावों की पहचान करने की जानकारी नहीं होती।
हालांकि, अभिनेत्री का कहना है कि वह सोशल मीडिया का इस्तेमाल डर के कारण बंद नहीं करना चाहतीं। उन्होंने कहा कि वह अब इंटरनेट पर साझा की जाने वाली सामग्री को लेकर अधिक सतर्क रहती हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर अपनी बात रखने और सक्रिय रहने से पीछे नहीं हटेंगी। उनका मानना है कि इंटरनेट पर एक बार कोई सामग्री सार्वजनिक हो जाने के बाद उसके इस्तेमाल पर पूरी तरह नियंत्रण रखना संभव नहीं होता।
महिलाओं और लड़कियों को लेकर भी उन्होंने विशेष चिंता जताई। एश्वर्या के अनुसार लोग इंटरनेट पर दिखाई देने वाली सामग्री को कई बार बिना जांचे सच मान लेते हैं और तुरंत प्रतिक्रिया देने लगते हैं। ऐसे में किसी महिला की छवि से जुड़ी फर्जी या छेड़छाड़ की गई सामग्री उसके लिए गंभीर नुकसान का कारण बन सकती है।
उन्होंने कहा कि तस्वीरों में बदलाव और सामग्री को संदर्भ से अलग करके पेश करना कोई नई समस्या नहीं है, लेकिन एआई ने इसे कहीं अधिक गंभीर बना दिया है। अब किसी व्यक्ति के चेहरे और आवाज को इस तरह दोबारा तैयार किया जा सकता है कि वह ऐसा करते हुए दिखाई दे, जो उसने वास्तव में कभी किया ही नहीं। अभिनेत्री के मुताबिक किसी कलाकार का चेहरा और आवाज उसकी पेशेवर पहचान का अहम हिस्सा होते हैं और बिना अनुमति उनका इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
एश्वर्या ने कहा कि डिजिटल सामग्री के दुरुपयोग को रोकने की जिम्मेदारी केवल एक पक्ष की नहीं है। सामग्री तैयार करने वाले व्यक्ति की पहली जिम्मेदारी है कि वह किसी की पहचान, चेहरा या आवाज बिना अनुमति इस्तेमाल न करे। इसके साथ ही डिजिटल मंचों को भी शिकायत मिलने पर आपत्तिजनक और नुकसान पहुंचाने वाली सामग्री की पहचान कर उचित कार्रवाई करनी चाहिए।
उन्होंने आम लोगों से भी अपील की कि किसी संदिग्ध सामग्री को आगे बढ़ाने या साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करें। उनका कहना है कि सामग्री साझा करने वाला व्यक्ति भी उसके प्रसार का हिस्सा बन जाता है। इसलिए यह देखना जरूरी है कि सामग्री कहां से आई है, स्रोत विश्वसनीय है या नहीं और क्या किसी भरोसेमंद माध्यम ने उसकी पुष्टि की है।
एश्वर्या एआई को पूरी तरह नकारने के पक्ष में भी नहीं हैं। उनका मानना है कि मनोरंजन और फिल्म निर्माण के क्षेत्र में यह तकनीक रचनात्मकता के नए रास्ते खोल सकती है। फिल्मकार इसके जरिए नए विचारों को बेहतर तरीके से प्रस्तुत कर सकते हैं और कहानी कहने के अलग-अलग तरीकों के साथ प्रयोग कर सकते हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति के चेहरे, आवाज और पहचान के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट सीमाएं और सहमति जरूरी है।
अभिनेत्री का कहना है कि तकनीकी विकास और डिजिटल जागरूकता साथ-साथ चलनी चाहिए। एआई की प्रगति को रोका नहीं जा सकता, लेकिन लोगों को इसके प्रभाव और संभावित दुरुपयोग के बारे में जागरूक किया जा सकता है। उनके अनुसार एआई से डरने के बजाय उसे जिम्मेदारी के साथ इस्तेमाल करना सीखना चाहिए और मानवीय रचनात्मकता, पहचान, सहमति तथा सम्मान की रक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए।
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